यह तो तय है कि इस साल नहीं आ पाएगी फिल्म पद्मावती, लेकिन सवालों का क्या?

खोज न्यूज़ टुडे/बॉलीवुड :- जयपुर से शुरू हुई फिल्म पद्मावती के विरोध की लहर राष्ट्रव्यापी हो गई है इस बीच जो हालात बने हैं इन्हें देख कर लगता है कि इस साल प्रदर्शित नहीं हो पाएगी फिल्म पद्मावती, लेकिन इस फिल्म को लेकर सवाल अपनी जगह कायम हैं! इस दौरान कुछ ऐसे बेतुके बयान भी आए हैं जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सारी हदें पार कर दी गई हैं!

खबर है कि कांग्रेस के दो बड़े नेता पद्मावती विवाद के बीच विवादास्पद बयान को लेकर आमने-सामने हैं. इधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने महाराजाओं को कायर करार दिया, तो उधर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कड़ा विरोध करते हुए उन्हें सलाह दी कि शशि थरूर को पहले इतिहास पढऩा चाहिए कि महाराजाओं की क्या भूमिका थी!

शशि थरूर ने बेवक्त भाजपा को भी एक नया मुद्दा दे दिया केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तो शशि थरूर के समक्ष ही सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सभी महाराजाओं ने ब्रिटिश के सामने घुटने टेके थे? यही नहीं, स्मृति ईरानी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अमरिंदर सिंह आदि के सामने भी यही सवाल रख दिया!

याद रहे, पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा था कि… असलियत तो यह है कि इन तथाकथित महाराजाओं में हर एक जो आज मुंबई के एक फिल्मकार के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं, उन्हें उस समय अपने मान सम्मान की कोई चिंता नहीं थी जब ब्रिटिश इनके मान-सम्मान को पैरों तले रौंद रहे थे… वे खुद को बचाने के लिए भाग खड़े हुए थे! थरूर के ऐसे बेतुके बयान पर सोशल मीडिया पर भी भारी विरोध जारी है.

दरअसल, भारतीय राजा युद्ध के नीति-नियमों से संस्कारित थे जहां वीरता का सम्मान होता है और अमर्यादित तरीके से साम्राज्य विस्तार की कल्पना नहीं की जाती, लेकिन… गैरभारतीय हमलावर क्रूरता के साथ आगे बढ़ते रहे तो अंग्रेज, चालबाजी से साम्राज्य फैलाते गए! थरूर को कौन समझाए कि… धोखे से शेर का शिकार करनेवाले को शेर-सा सम्मान नहीं मिल सकता है!

वास्तविक कहानियों पर आधारित फिल्मों को लेकर नए दिशा-निर्देश तैयार करने की सख्त जरूरत है ताकि कोई भी फिल्मकार अपनी सोच के अनुरूप फिल्म बना कर न तो ऐतिहासिक नायक/नायिकाओं का अपमान करने की कोशिश करे और न ही किसी वर्ग/समाज की भावनाओं से खेल… खासकर, किसी भी वर्ग की महिला के सम्मान को प्रभावित करनेवाली फिल्मों के निर्माण और प्रदर्शन की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए!

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