चीनी सेना में शामिल हुआ रडार की पकड़ में न आने वाला युद्धक विमान ‘जे-20’

खोज न्यूज़ टुडे/नई दिल्ली :- चीन ने अमेरिका के लॉकहेड मार्टिन एफ -22 रैप्टर और एफ -35 लाइटनिंग के बराबर का कहे जाने वाले जे-20 युद्धक विमान बनाया है और इसे चीनी सेना को सौंप दिया गया है। यह विमान रडार की पकड़ में नहीं आएगा। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने यहां गुरुवार को कहा कि चीन के नए जे-20 विमान को औपचारिक रूप से सेना में शामिल कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि विमान के परीक्षणों को तय समय के अनुसार आयोजित किया जा रहा है। विमान का अनावरण पिछले वर्ष नवंबर में चीन के जुहाई गुआंग्डोंग प्रांत में 11वें हवाई प्रदर्शन के दौरान किया गया था।

जे-20 विमान ‘जिस पर देश और दुनिया भर के सैन्य हथिायार विशेषज्ञ करीबी नजर बनाए हैं’ चीन 20 साल पहले एयरोस्पेस तकनीक में पिछड़ा हुआ था, लेकिन अब इसमें अग्रणी बन चुका है.

लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस बेहद तेज और रडार की पकड़ में ना आने वाला यह नया लड़ाकू विमान जे-20 चीन की सैन्य क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है. चीन नए आधुनिक सैन्य उपकरणों को तेजी से विकसित करने के लिए रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है, जिनमें सबमरीन, एअरक्राफ्ट कैरियर और सैटेलाइट रोधी मिसाइल शामिल हैं. इसकी वजह से अमरीका और पूर्वी चीन एवं दक्षिण चीन सागर में पड़ोसी देशों में बेचैनी बढ़ रही है.

हालांकि इससे पहले चीन पर रूसी लड़ाकू विमानों की डिजायन की नकल करने के आरोप लगते रहे हैं और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इसका अगली पीढ़ी का जे-31 स्टील्थ फायटर अमेरिका द्वारा विकसित एफ-35 से काफी मिलता-जुलता है.

विमान की अन्य खूबियां

यह विमान 2100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. 20 मीटर लंबे और साढ़े चार मीटर ऊंचे इस विमान के डैने 13 मीटर के हैं.

यह विमान 36000 किलोग्राम से ज्यादा वजन लेकर उड़ान भर सकता है. इसमें एक बार में 25 हजार पौंड ईंधन भरा जा सकता है. विमान में एक पायलट के बैठने की जगह है. इससे बड़ी दूरी की आकाश से आकाश में मार करने वाली मिसाइलें छोड़ी जा सकती हैं.

ड्रैगन का अमेरिका को संदेश

जे-20 विमान साल 2018 से चीनी सेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा. कमर्शियल एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ऑफ चाइना ने अगले 20 वर्षों में विमान की मांग 40 हजार तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. चीन एयरशो के जरिये दुनिया को सामरिक के अलावा तकनीकी क्षमता से भी रूबरू कराना चाहता है. भारत अभी तक ऐसे स्टील्थ विमान नहीं बना पाया है जो दुश्मन के राडार को चकमा दे सके जबकि पाकिस्तान की जे-20 जैसे विमान खरीदने के लिए चीन से बातचीत चल रही है.

रक्षा विश्लेषकों का अनुमान है कि चीन ने हवाई प्रदर्शन के नाम पर अमेरिका को संदेश दिया है कि उसके ये विमान अमेरिका के एफ-22 और एफ-35 का जवाब हैं. अमेरिका के ये विमान जल्द ही प्रशांत महासागर और जापान में तैनात होने वाले हैं.

फाइटर प्लेन के निर्माण में पश्चिमी देशों पर निर्भरता खत्म करने के लिए चीन ने डिफेंस रिसर्च में काफी बढ़त हासिल कर ली है. मंगलवार को उसने पहली बार खुद के द्वारा निर्मित फाइटर प्लेन जे-20 का हवाई प्रदर्शन करके दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि वह इस दिशा में भी आगे है.

प्रदर्शनी के लिए 5 साल बाद उड़ाए जे-20 प्लेन

एक खबर यह भी है कि ये विमान साल 2011 में भी उड़ान भर चुके हैं, लेकिन आम लोगों को उनकी उड़ान नहीं दिखाई गई थी. जे-20 विमानों की ये उड़ानें हांग-कांग से 56 किलोमीटर दूर झुहाई में ‘चाइना इंटरनेशनल एविएशन एंड एयरोस्पेस’ प्रदर्शनी का हिस्सा थीं. हालांकि इससे पहले भी चीन दो वर्षों के अंतराल पर होने वाली इस प्रदर्शनी में अपने मिलिट्री हार्डवेयर का प्रदर्शन करता रहा है. वर्ष 2014 में उसने जे-31 फाइटर का प्रदर्शन किया था.

अमेरिका से डिजाइन चोरी!

सोशल मीडिया पर आरोप लगाए गए हैं कि चीन ने अमेरिका के एफ-35 विमानों की डिजाइन चोरी की है या करवाई है. एक यह फोटो जारी हुआ है, जिसमें चीन के जे-31 की तस्वीर को जे-35 की तस्वीर के साथ लगाकर दिखाया गया है.

गौरतलब कि चीन का यह लड़ाकू विमान अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित एफ-35 की तरह लगता है. रक्षा विशेषज्ञों ने इसे चीन की लंबी छलांग करार दिया है. कुछ विशेषज्ञों ने विमान की स्टील्थ क्षमता (रडार की पकड़ में न आना) पर भी सवाल उठाए हैं.

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...