देश के 13वें उपराष्ट्रपति बने वेंकैया नायडू, हिन्दी में ली पद और गोपनीयता की शपथ

खोज न्यूज़ टुडे/नई दिल्ली :- एम वेंकैया नायडू ने देश के 13वें उपराष्ट्रपति पद के रूप में शुक्रवार को शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पीएम नरेंद्र मोदी , पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित कई मंत्री और नेता मौजूद थे. शपथ ग्रहण के पहले नायडू राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. फिर दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर दीनदयाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. उन्होंने पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया और उसके बाद शपथ ग्रहण के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे. जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नाडयू को उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलायी.

उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी को दोगुणे से अधिक वोटों से हराया. वेंकैया नायडू आंध्रप्रदेश के नेल्लूर के रहने वाले हैं. वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और वाजपेयी युग से ही संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. वेंकैया के पास जबरदस्त संगठन कौशल है और अपने हास्य-व्यंग के लिए वे मशहूर रहे हैं.
शपथ ग्रहण के बाद अब वे संसद भवन जायेंगे जहां संसदीय कार्यमंत्री और राज्यमंत्री उनका स्वागत करेंगे. वेंकैया नायडू यहां पर भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे. 11 बजे वह सदन में प्रवेश कर जाएंगे. आपको बता दें कि भैरो सिंह शेखावत के बाद वेंकैया नायडू आरएसएस पृष्ठभूमि के दूसरे उपराष्ट्रपति हैं.

वेंकैया नायडू का राजनीतिक सफर-

 

वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ.नेल्लोर से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से राजनीति में स्नातक किया. विशाखापट्टनम के लॉ कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय कानून में डिग्री ली. कॉलेज के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए. नायडू पहली बार 1972 में जय आंध्रा आंदोलन से सुर्खियों में आए. 1975 में इमरजेंसी में जेल भी गए थे. -1977 से 1980 तक यूथ विंग के अध्यक्ष रहे. महज 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने. 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे. बीजेपी के विभिन्न पदों पर रहने के बाद नायडू पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए. इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने.

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