अगर आप चाहते है, धन और यश का लाभ तो जन्माष्टमी के दिन करें ये 5 उपाय

कुछ दिनों के बाद पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाया जाएगा। भादों माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 15 अगस्त,मंगलवार को है। अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए जन्माष्टमी के दिन कुछ उपाय करने से शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं।

सावन का पवित्र महीना खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण का महीना भाद्रपद शुरू हो चुका है। भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 15 अगस्त यानि मंगलवार को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का अनुसरण करने के बाद एक सफल आदमी कैसे बना जा सकता हैं। उनके ऐसे कई गुण थे जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

 

हम सभी जानते हैं कि श्रीकृष्ण बचपन से ही नटखट थे। श्री कृष्ण भले ही बाल रुप में थे और वे भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते भी थे कि कंस मामा उन्हें बार-बार मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहते थे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंह तोड़ जवाब देते थे।

साधारण जीवन जीना-

भगवान श्रीकृष्ण एक बड़े घराने से संबंध रखते थे वह गोकुल में राजा नंद के पुत्र थे फिर भी वे गोकुल के अन्य बालको को तरह ही रहते और घूमते-खेलते रहते थे। उन्होंने कभी भी किसी में कोई अंतर नहीं रखते थे। उनमें राज घराने का कोई घमंड नही आया हमेशा उनके चहेरे पर सरल भाव रखते थे।

कभी हार न माने-

भगवान श्रीकृष्ण ने कभी भी हार न मनाने का संदेश दिया था हमें किसी भी परिस्थिति में हार को नहीं मानना चाहिए। अंत का प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही परिणाम हमारे पक्ष में क्यों न हो।

दोस्ती निभाना-

 

कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को कौन नहीं जानता? लेकिन यह दोस्ती महज दोनों के प्रेम के कारण नहीं, वरन् एक-दूसरे के प्रति आदर के कारण भी प्रसिद्ध है। किंतु आज के जमाने में दोस्ती के असली मायने कोई नहीं जानता। श्रीकृष्ण ने हमेशा अपने मित्र सुदामा और अर्जुन का साथ दिया था।

मात-पिता का आदर करना-

 

श्रीकृष्ण को जन्म देवकी ने दिया था लेकिन उनका पालन-पोषण यशोदा और राजा नंद ने गोकुल में किया। यह जानते हुए कि उनके अपने माता-पिता उनसे दूर हैं, और ये उनके अभिभावक नहीं हैं, श्रीकृष्ण ने उन्हें दिल से प्रेम किया। उनका आदर और सम्मान करने में उन्होंने कोई कसर ना छोड़ी।

 

 

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