राज्य सभा चुनाव-अमित शाह और अहमद पटेल का राजनीतिक कौशल दांव पर

खोज न्यूज़ टुडे संवाददाता/नई दिल्ली :-  आठ अगस्त को राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के आला नेताओं ने गुजरात में डेरा जमा लिया है। इस चुनाव में खास तौर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल का राजनीतिक कौशल दांव पर लगा है। इस दिलचस्प लड़ाई में भाजपा की झोली में दो सीटें साफ साफ जाती नजर आ रही है। लेकिन तीसरी सीट के लिए ये लड़ाई सिर्फ सीट की लड़ाई नहीं है, बल्कि कांग्रेस और भाजपा के लिए सम्मान की लड़ाई बन चुकी है।

इस बीच एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने उनके साथ दगाबाजी की थी। अहमद पटेल को वोट देने का फैसला आलाकमान करेगा। उन्होंने कहा कांग्रेस वर्तमान हालत के लिए खुद जिम्मेदार है। हालांकि कांग्रेस के उम्मीदवार अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एनसीपी का समर्थन हासिल करने में कामयाब होंगे।

चुनावी मैदान में ये चेहरे

अमित शाह

अमित शाह किसी परिचय के मोहताज नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह की अगुवाई में देश के 18 राज्यों में केसरिया झंडा लहरा है। राज्य की राजनीति से हटकर अब वो राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक दे चुके हैं।

स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी केंद्र सरकार में टेक्सटाइल मंत्री हैं, फिलहाल वो सूचना प्रसारण मंत्रालय की कमान संभाल रही हैं।

अहमद पटेल

अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार हैं। यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में सीधे तौर पर बिना किसी जिम्मेदारी निभाते हुए ताकतवर थे।

बलवंत सिंह राजपूत

बलवंत सिंह राजपूत, कांग्रेस को अलविदा कहने वाले कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला के रिश्तेदार है। इनके चुनावी अखाड़े में उतरने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शिवाजी सरकार ने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस के लिए ये सम्मान की लड़ाई बन चुकी है, ठीक वैसे ही अहमद पटेल को रोकने के लिए भाजपा कोशिश करेगी।

अगर अहमद पटेल हार जाते हैं तो भाजपा जिस रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव में उतरने की कोशिश करेगी उसमें बदलाव नहीं करेगी। लेकिन अहमद पटेल की जीत से भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी होगी। इतना ही नहीं गुजरात विधानसभा का चुनाव देश की राजनीति की दिशा को तय करेगा।

दोस्ती या रिश्ते के बीच करना है चुनाव

वोटिंग के दिन शंकर सिंह वाघेला को अपनी रिश्तेदारी ओर दोस्ती में से किसी एक का चुनाव करना है। रिश्तेदारी कुछ इस तरह है कि हाल ही में कांग्रेस छोड़ बीजेपी ज्वाइन करने वाले बलवंत सिंह राजपूत शंकर सिंह वाघेला के रिश्ते में समधी हैं, जबकि अहमद पटेल पिछले 25 सालों से शंकरसिंह वाघेला के दोस्त रहे हैं। शंकर सिंह वाघेला के लिए राज्यसभा का ये चुनाव अस्तित्व का चुनाव भी है, क्योंकि शंकर सिंह वाघेला पहले बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए थे और अब वो कांग्रेस से अपना इस्तीफा भी दे चुके हैं। वैसे अभी तक उन्होंने बतौर विधायक अपना इस्तीफा नहीं दिया है, जिस वजह से वो राज्यसभा के लिए अपना वोट डाल सकते हैं।

वाघेला पर अपने समधी को जिताने के साथ-साथ अपने बेटे का भी राजनीतिक भविष्य ताख पर रखा है। हालांकि कांग्रेस से अब तक जिन 6 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उसके पीछे लोग शंकर सिंह वाघेला को जिम्मेदार मानते हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस में अभी ऐसे सात विधायक और भी हैं जिन्होंने फिलहाल इस्तीफा तो नहीं दिया है लेकिन वे पार्टी से बगावत कर चुके हैं।

राज्यसभा चुनाव का ये है गणित

विधानसभा में भाजपा के 121, कांग्रेस के 51, एनसीपी के दो, जेडीयू का एक और एक निर्दलीय विधायक हैं। जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 44 मतों की जरूरत होगी। लेकिन, वाघेला और उनके समर्थक विधायक नोटा का इस्तेमाल करते हैं, तो कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है।

अब कांग्रेस विधायक बैक टू गुजरात

बीते कई दिनों से बेंगलुरु के एक रिजोर्ट में रह रहे गुजरात कांग्रेस के 44 विधायक वापस अहमदाबाद लौट आए हैं। इन विधायकों को अहमदाबाद से कुछ दुर आनंद के नित्यानंद रिजार्ट में ठहराया गया है। इन विधायकों को बुधवार को सीधे यहीं से मतदान के लिए विधानसभा ले जाया जाएगा। आनंद पुलिस का कहना है कि विधायकों की हिफाजत के लिए रिजार्ट के बाहर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद है।

कांग्रेस ने भाजपा पर खरीदफरोख्त का आरोप लगाया 

कांग्रेस ने 8 अगस्त को गुजरात में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा पर अपने विधायकों को लालच और धमकी से तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए 44 एमएलए बेंगलुरू भेज दिए थे। जहां इन्हें एक रिजॉर्ट में ठहराया गया था। मंगलवार को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले अहमद पटेल आज शाम रिजार्ट में सभी विधायकों से मुलाकात करेंगे। इससे पहले अहमद पटेल ने कहा कि वो राज्यसभा चुनाव में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। सभी विधायक उनके साथ हैं।

चुनावी मैदान में ये चेहरे

 

अमित शाह

अमित शाह किसी परिचय के मोहताज नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह की अगुवाई में देश के 18 राज्यों में केसरिया झंडा लहरा है। राज्य की राजनीति से हटकर अब वो राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक दे चुके हैं।

 

स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी केंद्र सरकार में टेक्सटाइल मंत्री हैं, फिलहाल वो सूचना प्रसारण मंत्रालय की कमान संभाल रही हैं।

 

अहमद पटेल

अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार हैं। यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में सीधे तौर पर बिना किसी जिम्मेदारी निभाते हुए ताकतवर थे।

बलवंत सिंह राजपूत

बलवंत सिंह राजपूत, कांग्रेस को अलविदा कहने वाले कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला के रिश्तेदार है। इनके चुनावी अखाड़े में उतरने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

 

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