सुप्रीम कोर्ट का फैसला – नहीं हटेंगे शिक्षामित्र दो साल में करना होगा टीटी पास

खोज न्यूज़ टुडे,संवाददाता/नई दिल्ली:- यूपी में सहायक अध्यापक के पद पर शिक्षामित्रों के समायोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा, ”1 लाख 72 हजार शिक्षामित्रों में से समायोजित हुए 1 लाख 36 हजार शिक्षामित्र सहायक अध्यापक के पद पर बने रहेंगे। वहीं, सभी 1 लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दो साल के अंदर टीईटी परीक्षा पास करना होगा। इसके ल‍िए उन्हें दो साल में दो मौके म‍िलेंगे।” बता दें, 1 लाख 72 हजार शिक्षामित्रों में से 22 हजार शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिन्हों ने टीईटी एग्जाम पास कर रखा है। ऐसे में वह सुरक्ष‍ित हैं। साथ ही इन दो सालों में टीईटी परीक्षा पास करने के लिए उम्र के नियमों में भी छूट दी जाएगी। जस्ट‍िस एके गोयल और ज‍स्ट‍िस यू यू ललित की बेंच ने आदेश सुनाते हुए ये भी कहा कि अनुभव के आधार पर शिक्षामित्रों को वेटेज का भी लाभ मिलेगा।

शिक्षामित्रों की ओर से सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, जयंत भूषण, आरएस सूरी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी ओर से दलीलें पेश की थी। शिक्षामित्रों की ओर से पेश अधिकतर वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्र वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनका भविष्य अधर में है।

ऐसे में उन्हें सहायक शिक्षक के तौर पर जारी रखा जाए। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करें।

शिक्षामित्रों की तरफ से सलमान खुर्शीद ने रखा था पक्ष

शिक्षामित्रों की ओर से सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, जयंत भूषण, आरएस सूरी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी ओर से दलीलें पेश की थी। शिक्षामित्रों की ओर से पेश अधिकतर वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्र वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनका भविष्य अधर में है। ऐसे में उन्हें सहायक शिक्षक के तौर पर जारी रखा जाए। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करें।

शिक्षामित्र स्नातक बीटीसी और टीईटी पास हैं। कई ऐसे हैं जो करीब 10 सालों से काम कर रहे हैं। वहीं शिक्षामित्रों की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह कहना गलत है कि शिक्षामित्रों को नियमित किया गया है।

उन्होंने कहा कि सहायक शिक्षकों के रूप में उनकी नियुक्ति हुई है। वकीलों का कहना था कि राज्य में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए स्कीम के तहत शिक्षामित्रों की नियुक्ति हुई थी। लेकिन ये नियुक्ति गलत ढंग से हुई है।

कोर्ट ने दिया था ये जवाब

मामले पर सुनवाई के दौरान शिक्षामित्रों के वकीलों ने कोर्ट से कहा था कि सहायक शिक्षकों के मामले में कोर्ट अप्वाइंट हो चुके शिक्षकों को ना छेड़े। उन लोगों के पास एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के अलावा 17 साल टीचिंग का एक्सपीरियंस भी है।

इस पर दोनों जजों की बेंच ने कहा था कि नियम के दायरे में जो भी जरूरी कदम होगा, वही उठाया जाएगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

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